वैश्य समाज के व्यापारी नेताओं ने राहुल गांधी से की अहम मुलाकात, बड़े राजनीतिक संकेत

अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला के नेतृत्व में प्रदेश के प्रसिद्ध उद्योगपतियों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिला और व्यापारियों के सामने आ रही समस्याओं पर मंथन किया। संसद के बजट सत्र से पहले प्रदेश के उद्योगपतियों की राहुल गांधी से यह मुलाकात बहुत मायने रखती है। राहुल गांधी ने इन उद्योगपतियों को आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को गंभीरता से बजट सत्र में उठाने का काम करेंगे। राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले उद्योगपतियों में प्रदीप गुप्ता, अंकुश जैन, मुदित अग्रवाल, जगमोहन गोटेवाले, प्रकाश बैरागी, पीके अग्रवाल, राजेश गर्ग, अमिताभ सिंघल प्रमुख रूप से शामिल थे।
सांसद राहुल गांधी ने एक-एक मुद्दे पर, एक-एक विषय को माननीय राहुल गांधी ने एकाग्रता के साथ सुना और एक-एक विषय पर बारीकी से अध्ययन करने की भी बात कही। वैश्य समाज के प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा कि वे इस सरकार से पूरी तरह निराश हैं और आशंकित हैं कि यदि यही नीतियां जारी रहीं, तो देश की अर्थव्यवस्था को विनाशकारी नुकसान होगा। उन्होंने लोकतंत्र, उत्पादन और रोजगार आधारित भारत के लिए राहुल गांधी के संघर्ष और दृष्टिकोण के साथ खुलकर खड़े होने की प्रतिबद्धता जताई।
इस दौरान उद्योगपतियों ने कहा कि वैश्य समाज को भारतीय जनता पार्टी अपना कोर वोट बैंक मानती है। उसे लगता है कि वैश्य समाज का चाहे पार्टी कितना भी दोहन कर ले समाज उसके साथ खड़ा रहेगा। बुवानीवाला ने कहा कि वैश्य समाज समाजवाद के अग्रदूत महाराजा अग्रसेन की परंपरा का वह समाज है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को जमीन से खड़ा करने में बड़ा योगदान दिया है। अग्रवाल समाज उत्पादन करता है, रोजगार देता है और उत्पादक व उपभोक्ता के बीच सेतु की भूमिका निभाता है। इसके बावजूद मोदी सरकार की नीतियों में इस समाज के लिए न सम्मान है, न सुरक्षा – केवल उपेक्षा और शोषण है।

करीब पौने घंटे की इस मुलाकात के दौरान वैश्य समाज और कांग्रेस पार्टी के बीच के संवाद, जीएसटी, फिक्स बिजली चार्ज, वन नेशन वन टैक्स, एमएसएमई एवं ऑनलाइन व्यापार से जुड़े खुदरा व मोहल्लों के दुकानदारों की समस्याएं सांझा करते हुए वैश्य समाज के प्रतिनिधियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ व्यापार संवाद किया और व्यवसाय में आ रही गंभीर परेशानियों को उनके समक्ष रखा। संवाद के दौरान वैश्य समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि जीएसटी व्यवस्था सुधार नहीं, दमन का औजार है। इसके अव्यावहारिक और तर्कहीन स्लैब जानबूझकर इस तरह बनाए गए हैं कि छोटे और मध्यम व्यापार टिक ही न सकें – महंगाई बेलगाम पर है, बाजार दम तोड़ रही है और रोजगार लगातार खत्म हो रहे हैं। इन व्यापारियों की एक बड़ी चिंता रिर्जव शुल्क संरचना है, जो एक दिखावटी सुधार भर है। कच्चा मॉल पर जीएसटी बढ़ाकर और तैयार उत्पादों पर जीएसटी घटाकर सरकार उपभोक्ता राहत का भ्रम पैदा करती है। वास्तविकता यह है कि उपभोक्ताओं के लिए कीमतें लगभग वही रहती हैं, जबकि छोटे और मध्यम उत्पादकों की लागत बढ़ती है, मुनाफा घटता है और वे धीरे-धीरे बाज़ार से बाहर होने को मजबूर हो जाते हैं। यह सुधार नहीं, बल्कि छोटे उत्पादकों को नुकसान पहुंचाने और बड़े खिलाडिय़ों को फायदा पहुँचाने की नीति है।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि भाजपा की केंद्र हो या राज्य सरकार, दोनों सरकारें आम जनता के विश्वास को तोड़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा वोट चोरी से सरकार तो बना सकती है, लेकिन देश की जनता का दिल नहीं जीत सकती। देश की जनता का दिल सांसद एवं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जीता है। वे देश की संसद में विपक्ष के नेता के रूप में देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज को बुलंद करते हैं, वहीं सत्ता में बैठी भाजपा सरकार अंतिम व्यक्ति पर टैक्स, बिजली सरचार्ज और अनेक टैक्स का बोझ डालकर परेशान करने का काम कर रही है।
राहुल गांधी पहले ही बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि मोनोपॉली और ड्यूपॉली आधारित शासन मॉडल भारत को आर्थिक रूप से खोखला कर देगा। जब सरकार दो-तीन लोगों के हितों के लिए काम करती है, तब बाजार से प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है और छोटे व्यापारी, दुकानदार व उद्यमी समाप्त कर दिए जाते हैं आज देश उसी सच्चाई से रू-ब-रू है। व्यापार में भी, भाजपा 90 प्रतिशत को बाहर रखकर सिर्फ़ कुछ चुने हुए लोगों के फायदे के लिए ही काम करती है। श्री राहुल गांधी लगातार कहते रहे हैं कि भारत को विनिर्माण देश बनाने के बजाय मोदी सरकार ने उसे असेंबलिंग मार्केट बना दिया। इसका सीधा नुकसान छोटे उत्पादकों को हुआ है – आयात बढ़ा, घरेलू उत्पादन टूटा और न उत्पाद का दाम मिला, न बाजार। राहुल गांधी ने इस खतरे को बहुत पहले पहचान लिया था और जीएसटी के जरिए हो रही लूट को उन्होंने सार्वजनिक रूप से गब्बर सिंह टैक्स कहकर देश को आगाह किया था। व्यापारी वर्ग आज डर और दबाव में जी रहा है विपक्ष के साथ खड़े होने पर जांच, छापे और बदले की कार्रवाई का भय एक स्थापित सच्चाई बन चुका है। राहुल गांधी ने बार बार कहा है कि देश में रोजगार 3-4 अरबपति नहीं बना सकते रोजगार आएगा उत्पादन से, एमएसएमई से। इसीलिए राहुल गांधी ने समाज और व्यापार के नेताओं से बातचीत करते हुए सांप का कि वह आने वाले संसद सत्र में बजट के दौरान उन लोगों की आवाज बनकर खड़े होंगे।